अंतरिक्षीय कचरा

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संदर्भ:

रूस ने नवंबर में एक मिसाइल परीक्षण में अपने पुराने उपग्रहों में से एक को नष्ट कर दिया था, जिसकी वजह से पृथ्वी की कक्षा के चारों ओर बिखरने वाले ‘अंतरिक्ष मलबे’ (Space debris) से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोष फ़ैल गया है।

हाल ही में, ‘सिंघुआ साइंस सैटेलाइट’ (Tsinghua Science Satellite) नामक एक चीनी उपग्रह, इस रूसी एंटी-सैटेलाइट मिसाइल परीक्षण के परिणामस्वरूप बिखरे हुए मलबे के एक टुकड़ों के साथ टकरा गया था।

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हर गुजरते हुए दशक के साथ विभिन्न देशों के द्वारा अंतरिक्षीय गतिविधियों में वृद्धि होती जा रही है, और इसके साथ ही अंतरिक्ष में मलबे की समस्या नियंत्रण से बाहर हो रही है। रूस द्वारा उपग्रह-रोधी हथियारों के परीक्षण, जैसी हालिया घटनाएं इस समस्या को और बढ़ा रही हैं।

यह मलबा, अब अंतरिक्ष कबाड़ की समस्या को बढ़ा रहा है और अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) और भूस्थिर कक्षा में उपग्रहों के लिए एक बड़ा खतरा पैदा कर रहा है।

अंतरिक्षीय मलबा, वर्तमान में अंतरिक्ष में रहने वाले अमेरिकी, रूसी और चीनी अंतरिक्ष यात्रियों के जीवन के लिए एक संभावित खतरा भी बन सकता है।

‘अंतरिक्षीय कचरा’ क्या होता है?

अंतरिक्षीय कचरा अथवा अंतरिक्षीय मलबा (Space debris), संचार, परिवहन, मौसम और जलवायु निगरानी, ​​रिमोट सेंसिंग जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के निष्पादन में सहयोग करने वाली, अंतरिक्ष में स्थित प्रौद्योगिकियों के समक्ष, एक वैश्विक खतरा उत्पन्न करता है।

राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से, और भारतीय मूल की सार्वजनिक और निजी संपत्ति की सुरक्षा के लिए भी, इन अंतरिक्षीय-पिण्डों से टकराव की संभावना का अनुमान लगाना काफी महत्वपूर्ण है।