अंतरिक्ष स्टेशन

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संदर्भ:

चीन, वर्ष 2024 या अधिकतम वर्ष 2030 तक, एक अपना निजी ‘अंतरिक्ष स्टेशन’ (Space Station) रखने वाला देश और संभवतः इकलौता देश बनने के लिए तैयार है। इसे देखते हुए, भारत द्वारा भी आगामी कुछ वर्षों में अपना अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने की योजना बनाई जा रही है।

हाल ही में, केंद्रीय अंतरिक्ष मंत्री जितेंद्र सिंह ने संसद में, वर्ष 2030 तक भारत का पहला अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित किए जाने की घोषणा की थी।

पृष्ठभूमि:

यद्यपि, वर्तमान में ‘अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन’ (International Space Station- ISS) का कार्यकाल वर्ष 2024 में समाप्त होना निर्धारित है, किंतु नासा (NASA) और इस परियोजना के अन्य अंतरराष्ट्रीय भागीदारों ने ‘अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन’ (ISS) के परिचालन जीवन को वर्ष 2030 तक बढाए जाने के संकेत दिए हैं।

‘चीनी अंतरिक्ष स्टेशन’ के बारे में:

चीन का नया मल्टी-मॉड्यूल ‘तिआनगोंग’ (Tiangong) अंतरिक्ष स्टेशन कम से कम 10 वर्षों तक कार्य करने के तैयार हो चुका है।

यह अंतरिक्ष स्टेशन पृथ्वी की सतह से 340-450 किमी की ऊंचाई पर पृथ्वी की निचली कक्षा में कार्य करेगा।

चीनी अंतरिक्ष स्टेशन का महत्व:

पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थित चीनी अंतरिक्ष स्टेशन, चीन की आकशीय दृष्टि की भांति कार्य करेगा, और यह चीन के अंतरिक्ष यात्रियों के लिए, विश्व के बाकी हिस्सों का चौबीसों घंटे विहंगम दृश्य प्रदान करेगा।

यह अंतरिक्ष स्टेशन, चीन को वर्ष 2030 तक एक प्रमुख अंतरिक्ष शक्ति बनने के लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेगा।

संबंधित चिंताएं:

चीन का अंतरिक्ष स्टेशन रोबोटिक-आर्म से लैस होगा जिस पर अमेरिका द्वारा इसके संभावित सैन्य अनुप्रयोगों में उपयोग किए जाने पर चिंता जताई है।

चिंता की बात यह है कि इस तकनीक का “भविष्य में अन्य उपग्रहों से साथ मॉल-युद्ध करने में इस्तेमाल किया जा सकता है”।