आभासी डिजिटल संपत्ति

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संदर्भ:

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने 1 फरवरी को दिए गए बजटीय भाषण में ‘वर्चुअल डिजिटल संपत्ति’ (Virtual Digital Assets) से होने वाली आय पर 30 प्रतिशत कर लगाने की घोषणा की है।

इस फैसले के पीछे का तर्क:

हाल के वर्षों में, डिजिटल माध्यम से होने वाले लेन-देन में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है और इन लेनदेन की परिमाण और आवृत्ति की वजह से, एक विशिष्ट ‘कर व्यवस्था’ का प्रावधान करना अनिवार्य हो गया है।

‘वर्चुअल डिजिटल संपत्ति’ क्या हैं और ये ‘डिजिटल मुद्रा’ से किस प्रकार भिन्न हैं?

सरल शब्दों में कहा जाए, तो ‘वर्चुअल डिजिटल परिसंपत्तियों’ में क्रिप्टोकरेंसी, डीसेंट्रलाइज्ड फाइनेंस (Decentralised Finance – DeFi) और गैर-प्रतिमोच्य टोकन (Non-Fungible Tokens – NFTs) शामिल किया जाता है। प्रथम दृष्टया, इसमें डिजिटल सोना, केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC) या कोई अन्य पारंपरिक डिजिटल परिसंपत्तियों को शामिल नहीं किया जाता है। इसलिए, सरकार के उपरोक्त कदम का उद्देश्य विशेष रूप से क्रिप्टोकरेंसी पर ‘कर’ लगाना है।

वित्त विधेयक के अनुसार, एक आभासी / वर्चुअल डिजिटल संपत्ति का तात्पर्य, “क्रिप्टोग्राफिक माध्यमों या किसी अन्य माध्यम से उत्पन्न होने वाली, चाहे उसे किसी भी कोई नाम से जाना जाता हो बशर्ते विनिमय के लिए डिजिटल रूप से इसका प्रतिनिधित्व करती हो, अंतर्निहित कीमत के वादे या प्रतिनिधित्व करने वाली, अथवा कीमत भंडार के रूप में कार्य करने वाली तथा जिसका प्रयोग किसी भी वित्तीय लेनदेन या निवेश में किया जाता है किंतु केवल निवेश योजनाओं तक सीमित नहीं हो, और जिसे इलेक्ट्रॉनिक रूप से हस्तांतरित, संग्रहीत या कारोबार किया जा सकता हो, किसी भी जानकारी या कोड या संख्या या टोकन (भारतीय मुद्रा या किसी विदेशी मुद्रा के अलावा) से है”। ‘गैर-प्रतिमोच्य टोकन’ (Non fungible token) और इसी तरह की प्रकृति के किसी भी अन्य टोकन को ‘वर्चुअल डिजिटल संपत्ति’ की परिभाषा में शामिल किया गया है।”