इसरो का नया SSLV कार्यक्रम

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संदर्भ:

‘भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन’ (ISRO) के स्वदेश निर्मित प्रक्षेपण रॉकेट को ‘लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान’ (Small Satellite Launch Vehicle – SSLV) द्वारा पहले से ही काफी विलंबित हो चुकी पहली विकास उड़ान, इस अप्रैल में भरने की संभावना है।

2018 से तिरुवनंतपुरम में विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र के निदेशक के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान इसरो (ISRO) के नए अध्यक्ष सोमनाथ को SSLV के डिजाइन और विकास का श्रेय दिया जाता है।

‘लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान’ क्या है?

‘लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान’ (SSLV) का उद्देश्य, पृथ्वी की निचली कक्षाओं में छोटे उपग्रहों को लॉन्च करने के लिए बाजार की मांग की आपूर्ति को पूरा करना है।

यह 500 किलोग्राम वजन के उपग्रहों को पृथ्वी की निचली कक्षा में ले जाने में सक्षम है।

SSLV, 110 टन भार के साथ इसरो का सबसे छोटा प्रक्षेपण वाहन है।

इसको इंटिग्रेट होने में मात्र 72 घंटे का समय लगेगा तथा इसको एकीकृत करने के लिए मात्र छह लोगों की आवश्यकता होगी।

इसके निर्माण में लगभग मात्र 30 करोड़ रुपए की लागत आयेगी।

यह यान एक बार में कई माइक्रोसेटेलाइट लॉन्च करने के लिए सबसे उपयुक्त वाहन है, और यह कई कक्षाओं में उपग्रह भेजने में सक्षम है।

आवश्यकता:

हाल के वर्षों में, विकासशील देशों, निजी संस्थाओं और विश्वविद्यालयों द्वारा पृथ्वी की निचली कक्षाओं में छोटे उपग्रहों को भेजे जाने संबंधी जरूरतों की वजह से छोटे उपग्रहों का प्रक्षेपण काफी महत्वपूर्ण हो गया है।

केवल राष्ट्रीय मांग को पूरा करने के लिए, हर साल लगभग 15 से 20 ‘लघु उपग्रह प्रक्षेपण यानों’ (SSLVs) की आवश्यकता होगी।

ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (PSLV):

छोटे उपग्रहों का प्रक्षेपण, अब तक ISRO के शक्तिशाली वाहन – ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (Polar Satellite Launch Vehicle) – द्वारा बड़े उपग्रहों के प्रक्षेपण के साथ किया जाता रहा है। PSLV अब तक 50 से अधिक सफल प्रक्षेपण कर चुका है।

ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान / ’पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल’, इसरो द्वारा एक स्वदेशी रूप से विकसित उपभोजित (Expendable) प्रक्षेपण प्रणाली है।

यह मध्यम भारवाली प्रक्षेपण यानो की श्रेणी के अंतर्गत आता है, तथा यह भू-तुल्यकालिक अंतरण कक्षा (Geo Synchronous Transfer Orbit), पृथ्वी की निचली कक्षा (Lower Earth Orbit) और सूर्य तुल्यकाली ध्रुवीय कक्षा (Polar Sun Synchronous Orbit) सहित विभिन्न कक्षाओं तक उपग्रहों को पहुंचाने में सक्षम है।

PSLV, 1000 किलो वजन तक उपग्रहों को प्रक्षेपित करने में सक्षम है। किंतु, इस प्रक्षेपण यान को एकीकृत करने में 70 दिन का समय लगता है।

ध्रुवीय उपग्रह प्रमोचक राकेट (PSLV) भारत का तृतीय पीढ़ी का प्रमोचक राकेट है। यह पहला भारतीय प्रमोचक राकेट है जो द्रव चरणों से सुसज्जित है।

पीएसएलवी के बारे में अधिक जानकारी के लिए पढ़िए

PSLV और GSLV के मध्य अंतर:

वर्तमान में, भारत के पास दो प्रक्षेपण यान हैं, ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान / ’पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल’(PSLV) और भू-तुल्यकाली उपग्रह प्रक्षेपण वाहन / जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (GSLV)।

PSLV को ‘पृथ्वी की निचली कक्षा में परिभ्रमण करने वाले उपग्रहों’ (low-Earth Orbit satellites) को ध्रुवीय और सूर्य तुल्यकालिक कक्षाओं में प्रक्षेपित करने के लिए विकसित किया गया था। बाद में, इस राकेट ने, भू-तुल्यकालिक, चंद्र और अंतर-ग्रहीय अंतरिक्ष यानों को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित करके इसकी बहुमुखी उपयोग क्षमता साबित की है।

दूसरी ओर, भू-तुल्यकाली उपग्रह प्रक्षेपण वाहन (GSLV)।, को इन्सैट श्रेणी के भारी भू- तुल्यकालिक उपग्रहों को कक्षाओं में लॉन्च करने के लिए विकसित किया गया था। अपने तीसरे और अंतिम चरण में, जीएसएलवी में स्वदेशी रूप से विकसित ऊपरी चरण के क्रायोजेनिक का उपयोग किया गया था।

अंतरिक्ष से संबंधित विभिन्न कक्षाएँ:

भूस्थिर कक्षा (Geostationary orbit – GEO)

पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth orbit – LEO)

पृथ्वी की मध्यम कक्षा (Medium Earth orbit – MEO)

ध्रुवीय कक्षा और सूर्य-तुल्यकालिक कक्षा (Sun-synchronous orbit – SSO)

अंतरण कक्षाएँ और भूस्थिर स्थानांतरण कक्षा (geostationary transfer orbit – GTO)

लैग्रेंज बिंदु (Lagrange points – L-points)