इस्लामिक सहयोग संगठन

55

संदर्भ:

ईरान के राजनयिक ‘इस्लामिक सहयोग संगठन’ (Organization of Islamic Cooperation) में पद संभालने हेतु कई वर्षों बाद, सऊदी अरब आ रहे हैं।

‘इस्लामिक सहयोग संगठन’ में ईरानी प्रतिनिधिमंडल का आगमन, वर्ष 2016 में तेहरान और रियाद के मध्य संबंधों में खटास आने के बाद, इस तरह का पहला राजनयिक कदम है।

पृष्ठभूमि:

वर्ष 2016 में, सऊदी अरब द्वारा शिया धर्मगुरु निमिर अल-निमिर को फांसी दिए जाने के बाद, ईरान में प्रदर्शनकारियों द्वारा ‘सऊदी राजनयिक मिशनों’ पर हमले किए गए थे।

इसके प्रत्युत्तर में ‘रियाद’ ने ‘तेहरान’ के साथ अपने संबंध समाप्त कर दिए थे, हालाँकि ‘इस्लामिक सहयोग संगठन’ (OIC) के विदेश मंत्रियों ने इस हिंसा की निंदा की थी।

इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC)  के बारे में:

OIC, वर्ष 1969 में स्थापित एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन है, वर्तमान में इसमें 57 सदस्य देश सम्मिलित हैं।

यह संयुक्त राष्ट्र संघ के पश्चात दूसरा सबसे बड़ा अंतर-सरकारी संगठन है।

इस संगठन का कहना है कि यह “मुस्लिम विश्व की सामूहिक आवाज” है, और इसका उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय शांति और सद्भाव को बढ़ावा देना और साथ ही दुनिया के मुस्लिम समुदायों के हितों की रक्षा और संरक्षण हेतु कार्य करना है।

संयुक्त राष्ट्र संघ और यूरोपीय संघ में OIC के स्थायी प्रतिनिधिमंडल हैं।

इसका स्थायी सचिवालय सऊदी अरब के जेद्दाह में है।

भारत के लिए OIC का महत्व:

हाल के दिनों में भारत और OIC के मध्य आर्थिक और ऊर्जा संबंधी परस्पर निर्भरता में वृद्धि विशेष रूप महत्वपूर्ण हो गई है।