ऑक्सफैम इंटरनेशनल:

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ऑक्सफैम इंटरनेशनल का गठन वर्ष 1995 में हुआ था जो स्वतंत्र गैर-सरकारी संगठनों का एक समूह है।
“ऑक्सफैम” नाम ब्रिटेन में वर्ष 1942 में स्थापित ‘अकाल राहत के लिये ऑक्सफोर्ड सहायता समिति’ (Oxford Committee for Famine Relief) से लिया गया है।
इस समूह ने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान ग्रीस में भूख से पीड़ित महिलाओं और बच्चों के लिये भोजन की आपूर्ति हेतु अभियान चलाया।
इसका उद्देश्य वैश्विक गरीबी और अन्याय को कम करने के लिये कार्य क्षमता को बढ़ाना है।
ऑक्सफैम का अंतर्राष्ट्रीय सचिवालय नैरोबी (केन्या) में स्थित है।
निष्कर्ष:
वर्ष 2000-02 तकं संयुक्त राष्ट्र ने मानवीय सहायता के रूप 1.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर की अपील की थी तथा वर्ष 2019-2021 तक की गई अपील राशि औसतन 15.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गई जो अभूतपूर्व 819% वृद्धि को दर्शाता है।
धनी देशों द्वारा पिछले पाँच वर्षों में संयुक्त राष्ट्र द्वारा की गई अपील की 54% की पूर्ति की गई है, जिससे इन देशों को 28-33 बिलियन अमेरिकी डॉलर का घाटा हुआ है।
निम्न आय वाले देशों में लोग जलवायु से संबंधित आपदाओं के प्रभावों के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील होते हैं, चाहे वह सूखा, बाढ़ या वनाग्नि कुछ भी हो, क्योंकि ये आपदाएँ गरीबी एवं मौत के आँकड़ों को और अधिक प्रभावित करती हैंं।
भारी वित्तीय बोझ के अलावा जलवायु संकट के कारण होने वाली क्षति में स्वास्थ्य, जैव विविधता एवं स्वदेशी ज्ञान की हानि, लिंग संबंधी मुद्दे तथा अन्य संबंधित कारक शामिल हैं।
संयुक्त राष्ट्र को मानवीय सहायता के लिये आवश्यक प्रत्येक 2 अमेरिकी डॉलर की तुलना में अमीर देश केवल 1 अमेरिकी डॉलर ही प्रदान करते हैं।