‘गेन-ऑफ-फंक्शन रिसर्च’

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गेन ऑफ फंक्शन’, वायरस में उत्परिवर्तन का कारण बनने वाली परिस्थितियों में, सूक्ष्मजीवों के वृद्धिमान प्रजनन पर केंद्रित अनुसंधान का एक क्षेत्र है।

इन प्रयोगों को ‘गेन ऑफ फंक्शन’ इसलिए कहा जाता है, क्योंकि इनमें रोगाणुओं (Pathogens) के साथ इस तरह से हेरफेर किया जाता है, कि इनके लिए किसी कार्य (function), जैसेकि प्रसार में वृद्धि, में अथवा इसके माध्यम से लाभ प्राप्त होता है।

इस तरह के प्रयोग, वैज्ञानिकों को उभरती संक्रामक बीमारियों की बेहतर भविष्यवाणी करने और टीके और चिकित्सीय उपचार विकसित करने का अवसर प्रदान करते हैं।

क्रिया-पद्धति:

इन प्रयोगों में, जानबूझकर किसी जीव का प्रयोगशाला में परिवर्तन, जीन-परिवर्तन, या किसी रोगाणु की प्रसरण क्षमता (transmissibility), प्रचंडता और प्रतिरक्षाजनत्व / इम्युनोजेनेसिटी (Immunogenicity) का अध्ययन करने हेतु इसमें उत्परिवर्तन (mutation) कराना शामिल होता है।

इन प्रक्रियाओं को, वायरस की जेनेटिक इंजीनियरिंग करके और इनके लिए विभिन्न माध्यमों में वृद्धि करने का अवसर देकर पूरा किया जाता है। इस तकनीक को सीरियल पैसेज (serial passage) कहा जाता है।

इस प्रकार के अनुसंधानों से संबंधित मुद्दे:

‘गेन-ऑफ-फंक्शन’ अनुसंधान में ‘हेरफेर’ (manipulation) का उपयोग किया जाता है, जिसके माध्यम से कुछ रोगाणु सूक्ष्मजीव अधिक घातक या अधिक संक्रामक बन जाते हैं।

इसके अलावा एक ‘लॉस-ऑफ-फंक्शन’ (loss-of-function) अनुसंधान भी होता है, जो ‘निष्क्रिय उत्परिवर्तन’ (inactivating mutations) से संबंधित है। इस प्रकार के प्रयोगों के परिणामस्वरूप रोगाणु, ‘निष्क्रिय’ (no function) हो जाते हैं अथवा अपना मुख्य कार्य करना कम कर देते हैं।

गेन-ऑफ-फंक्शन अनुसंधान में, कथित तौर पर जैव सुरक्षा संबंधी जोखिम अंतर्निहित होते हैं और इसी वजह से, इसके लिए ‘चिंताजनक दोहरा उपयोग अनुसंधान’ (dual-use research of concern- DURC) भी कहा जाता है।

सीरियल पैसेजिंग (Serial passaging) में, विभिन्न परिस्थितियों में रोगाणुओं को वृद्दि करने का अवसर देकर, उनमे होने वाले परिवर्तनों का अवलोकन किया जाता है।