गोल्ड हॉलमार्किंग

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संदर्भ:

सोने के आभूषण और कलाकृतियों (संशोधन) ऑर्डर, 2022 (Hallmarking of Gold Jewellery and Gold Artefacts (Amendment) Order, 2022) में उल्लखित प्रावधानों के अनुसार, ‘अनिवार्य हॉलमार्किंग’ (Mandatory Hallmarking) का दूसरा चरण 01 जून, 2022 से लागू होगा।

अनिवार्य हॉलमार्किंग के दूसरे चरण में भारतीय मानक आईएस 1417 में उल्लिखित सोने के भूषणों/कलाकृतियों के लिए तीन अतिरिक्त कैरेट अर्थात 20, 23 और 24 कैरेट को शामिल किया जाएगा।

इस चरण में 32 नए जिलों को शामिल किया जाएगा, जहां पहले चरण के क्रियान्वयन के बाद एक ‘परख एवं हॉलमार्क केंद्र’ (Assaying and Hallmarking Centres – AHC) स्थापित किया गया है।

केंद्र सरकार द्वारा यह आदेश 04 अप्रैल, 2022 को अधिसूचित किया गया था।

पृष्ठभूमि:

भारत सरकार द्वारा 16 जून, 2021 से सोने के आभूषणों की ‘अनिवार्य हॉलमार्किंग’ को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की घोषणा की गयी थी।

पहला चरण:

घोषणा के तहत, पहले चरण में केवल 256 जिलों में ही ‘गोल्ड हॉलमार्किंग’ (Gold Hallmarking) उपलब्ध कराए जाने तथा और 40 लाख रुपये से अधिक का वार्षिक कारोबार वाले जौहरियों को इस प्रावधान के दायरे में शामिल किया गया था।

‘गोल्ड हॉलमार्किंग’ क्या होती है?

हॉलमार्किंग, बहुमूल्य धातु की वस्तु में उस कीमती धातु के आनुपातिक अंश का सटीक निर्धारण और आधिकारिक रिकॉर्डिंग होती है।

इस प्रकार, हॉलमार्क, बहुमूल्य धातु की वस्तुओं की उत्कृष्टता या शुद्धता की गारंटी की तरह होता है और कई देशों में आधिकारिक चिह्न के रूप में प्रयोग किया जाता है।

भारत में, सोने और चांदी की हॉलमार्किंग योजना का कार्यान्वयन ‘भारतीय मानक ब्यूरो’ (Bureau of Indian Standard- BIS) द्वारा किया जाता है।

हॉलमार्किंग के दायरे में आने वाली धातुएं:

स्वर्ण आभूषण और स्वर्ण निर्मित की कलाकृतियां।

चांदी के आभूषण और चांदी की कलाकृति