नॉर्डिक ‘क्लिंकर बोट्स’

119

संयुक्त राष्ट्र के सांस्कृतिक संगठन- यूनेस्को ने हाल ही में नॉर्डिक ‘क्लिंकर बोट्स’ को अपनी विरासत सूची में शामिल कर लिया है। हज़ारों वर्षों तक लकड़ी की इन नावों ने उत्तरी यूरोप के लोगों को अपना व्यापार बढ़ाने और कभी-कभी समुद्र और महाद्वीपों में युद्ध करने में काफी मदद की।

इसके ऐतिहासिक महत्त्व को देखते हुए दिसंबर माह में डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड, नॉर्वे और स्वीडन ने संयुक्त रूप से ‘क्लिंकर बोट्स’ को यूनेस्को की विरासत सूची में शामिल करने की मांग की थी।

‘क्लिंकर’ शब्द का प्रयोग नाव की लकड़ी के बोर्डों को एक साथ बाँधे जाने के तरीके को संदर्भित करने हेतु किया जाता है। इतिहासकारों द्वारा एकत्रित साक्ष्यों के मुताबिक, ‘क्लिंकर’ तकनीक का विकास तकरीबन हज़ार वर्ष पूर्व कांस्य युग के दौरान हुआ था।

यूनेस्को का यह निर्णय नाव-निर्माण तकनीकों की रक्षा और संरक्षण में मददगार होगा। अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल करने का यह निर्णय नॉर्डिक देशों को इस लुप्त होती परंपरा के अवशेषों को संरक्षित करने का प्रयास करने हेतु बाध्य करता है।