भारतीय दिवाला एवं शोधन अक्षमता बोर्ड:

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भारतीय दिवाला और शोधन अक्षमता बोर्ड (IBBI) की स्थापना दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता, 2016 के तहत 1 अक्तूबर, 2016 को हुई थी।
यह संहिता के कार्यान्वयन के लिये ज़िम्मेदार पारिस्थितिकी तंत्र का एक प्रमुख स्तंभ है जो कॉर्पोरेट व्यक्तियों, साझेदारी फर्मों और व्यक्तियों के पुनर्गठन तथा दिवाला समाधान से संबंधित कानूनों को समयबद्ध तरीके से समेकित एवं संशोधित करता है ताकि ऐसे व्यक्तियों की संपत्ति के मूल्य को अधिकतम किया जा सके। उद्यमशीलता, ऋण की उपलब्धता को बढ़ावा देने के साथ ही सभी हितधारकों के हितों को संतुलित करता है।
यह एक अद्वितीय नियामक है क्योंकि यह पेशे के साथ-साथ प्रक्रियाओं को भी नियंत्रित करता है।
यह दिवाला पेशेवरों, दिवाला व्यावसायिक एजेंसियों, दिवाला व्यावसायिक संस्थाओं और सूचना उपयोगिताओं की नियामक निगरानी करता है।
इसे देश में मूल्यांकनकर्त्ताओं के पेशे के विनियमन और विकास के लिये कंपनी (पंजीकृत मूल्यांकनकर्त्ता एवं मूल्यांकन नियम), 2017 के तहत ‘प्राधिकरण’ के रूप में भी नामित किया गया है।