भारत गौरव पर्यटक ट्रेन

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रेल मंत्रालय की नई नीति के तहत इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) की पहली भारत गौरव टूरिस्ट ट्रेन चलाई जाएगी। 21 जून 2022 को यह ट्रेन अपनी पहली यात्रा शुरू करेगी।

यह ट्रेन किस रूट पर चलेगी?

यह ट्रेन उन सभी प्रमुख स्थानों को प्रदर्शित करेगी जो भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े हैं और इसमें जनकपुर, नेपाल भी शामिल है जो माता सीता का जन्मस्थान है। इस ट्रेन का 18 दिन का पहला सफर दिल्ली के सफदरजंग स्टेशन से शुरू होगा। यह स्वदेश दर्शन योजना के रामायण सर्किट पर चलेगा।

इस ट्रेन में क्या मिलेगा?

यह ट्रेन एक पेंट्री कार से सुसज्जित होगी जो पर्यटकों को ताजा बना शाकाहारी भोजन उपलब्ध कराने के लिए सुसज्जित होगी। सुरक्षा गार्ड और CCTV कैमरों के साथ एक इंफोटेनमेंट सिस्टम भी लगाया जाएगा। एक फेस मास्क, एक हैंड सैनिटाइज़र और हाथ के दस्ताने युक्त एक सुरक्षा किट भी प्रदान की जाएगी। सभी स्टाफ और पर्यटकों का तापमान भी चेक किया जाएगा। हॉल्ट स्टेशनों पर भी ट्रेन को बार-बार सैनिटाइज किया जाएगा।

भारत गौरव पर्यटक ट्रेनें क्या हैं?

भारतीय रेलवे ने देश के ऐतिहासिक स्थानों और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भारत के नागरिकों के साथ-साथ दुनिया भर के पर्यटकों को दिखाने के उद्देश्य से भारत गौरव पर्यटक ट्रेनों की शुरुआत की। ये ट्रेनें थीम बेस्ड टूरिस्ट सर्किट ट्रेनें हैं। इन ट्रेनों को केंद्र सरकार की “देखो अपना देश” पहल के तहत लॉन्च किया गया है।

यह ट्रेन कहाँ-कहाँ रुकेगी?

अयोध्या – भगवान श्रीराम की जन्मभूमि। यहां पर्यटक हनुमान मंदिर और श्री राम जन्मभूमि मंदिर के दर्शन करेंगे।

बक्सर – यहां पर्यटक रामरेखा घाट और महर्षि विश्वामित्र के आश्रम के दर्शन करेंगे।

सीतामढ़ी – यहां से पर्यटकों को सड़क मार्ग से जनकपुर ले जाया जाएगा। वे करेंगे राम-जानकी मंदिर के दर्शन।

वाराणसी – पर्यटक प्रयाग, वाराणसी सीता संहिता स्थल, चित्रकूट और श्रृंगवेरपुर जाएंगे।

नासिक – त्र्यंबकेश्वर मंदिर और पंचवटी में सैलानी दर्शन करेंगे।

कृष्णकिंधा, हम्पी – अंजनेयाद्रि पहाड़ियों के ऊपर स्थित श्री हनुमान की जन्मस्थली अन्य धार्मिक और विरासत स्थलों के दर्शन किये जाएंगे।

रामेश्वरम – धनुषकोडी और रामनाथस्वामी मंदिर के दर्शन होंगे।

कांचीपुरम – पर्यटक विष्णु कांची, शिव कांची और कामाक्षी मंदिर के दर्शन होंगे।

भद्राचलम, तेलंगाना – इस ट्रेन का अंतिम ठहराव।