भारत में मुस्लिम महिला अधिकार

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• 1 अगस्त मुस्लिम महिला अधिकार दिवस (Muslim Women Rights Day) के रूप में मनाया जाता है।
• यह दिवस 1 अगस्त को तीन तलाक बिल की पृष्ठभूमि में मनाया जाता है, जिसे 1 अगस्त, 2019 को संसद से मंज़ूरी मिली थी।
• भारत में कानून पारित होने के बाद से तीन तलाक के मामलों में 82% की कमी आई है।
• तीन तलाक बिल, मुस्लिम महिलाओं को तलाक की शर्तों की सामाजिक बुराई की बेड़ियों से मुक्त करने में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हुआ है।
• शाह बानो बेगम एवं अन्य बनाम मो. अहमद खान’ तथा ‘शायरा बानो बनाम भारत संघ और अन्य’ ने इस कदम की आधारशिला रखी।
• शायरा बानो ने अपनी रिट याचिका में सर्वोच्च न्यायालय से तीन प्रथाओं तलाक-ए-बिद्दत, बहुविवाह, निकाह-हलाला को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की थी।
• संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 21 तथा अनुच्छेद 25 के उल्लंघन के आधार पर मामला दर्ज किया गया था। तीन तलाक कानून ने ‘तीन तलाक’ को एक आपराधिक कृत्य घोषित किया।
• इस कानून को एक महत्त्वपूर्ण कदम माना जाता है क्योंकि इसने ‘तलाक’ की प्रथा को कानूनी रूप से अपराध घोषित करके लैंगिक असमानता के खिलाफ मुस्लिम महिलाओं की सुरक्षा एवं सशक्तीकरण को सुनिश्चित किया। इसलिये इस दिन को मुस्लिम महिला अधिकार दिवस के रूप में मनाया जाता है।
• यह कानून महिलाओं की आत्मनिर्भरता, आत्म-सम्मान को बढ़ावा देने का प्रयास करता है क्योंकि यह मुस्लिम महिलाओं के मौलिक और लोकतांत्रिक अधिकारों को मज़बूत करता है।
• तीन तलाक कानून के तहत तलाक की घोषणा को संज्ञेय अपराध (cognizable offence) माना जाएगा।
• इस कानून में ज़ुर्माने के साथ-साथ 3 साल के कैद की सज़ा का प्रावधान है।
• मिस्र वर्ष 1929 में तीन तलाक पर प्रतिबंध लगाने वाला पहला देश था। मिस्र के बाद सूडान, पाकिस्तान (वर्ष 1956 में), मलेशिया (वर्ष 1969 में), बांग्लादेश (वर्ष 1972 में), इराक (वर्ष 1959 में) और सीरिया (वर्ष 1953 में) में भी तीन तलाक को प्रतिबंधित किया गया है।
• हाल के वर्षों में संयुक्त अरब अमीरात, मोरक्को, ईरान, साइप्रस, कतर, जॉर्डन, ब्रुनेई, अल्जीरिया तथा साथ ही भारत ने इस प्रथा पर प्रतिबंध लगा दिया है।