भारत में रामसर स्थलों की बढ़ती संख्या

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चर्चा में क्यों?

हाल ही में, अंतर्राष्ट्रीय आर्द्रभूमि दिवस (2 फरवरी) के अवसर पर भारत के 2 नए स्थलों; खिजड़िया पक्षी अभयारण्य एवं बखिरा वन्यजीव अभयारण्य को रामसर सूची में शामिल किया गया है।

बखिरा वन्य जीव अभयारण्य

बखिरा वन्यजीव अभयारण्य उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर ज़िले में स्थित सबसे बड़ा प्राकृतिक बाढ़ मैदान है। वर्ष 1980 में स्थापित इस अभयारण्य की झील शीतकालीन प्रवासी पक्षियों के लिये महत्त्वपूर्ण है।

यहाँ तिब्बत, चीन, यूरोप और साइबेरिया से प्रवासी पक्षी नवंबर से जनवरी के मध्य में आते हैं। यहाँ 30 से अधिक मछली प्रजातियों के अलावा भारतीय बैंगनी मूरहेन जैसे पक्षी भी पाए जाते हैं।

खिजड़िया वन्यजीव अभयारण्य, गुजरात

गुजरात के जामनगर ज़िले में स्थित, खिजड़िया वन्यजीव अभयारण्य एक मीठे पानी की आर्द्रभूमि है, जो पक्षियों के लिये सबसे अनुकूल मानी जाती है। इसमें दलदली भूमि, मैंग्रोव, रेतीले समुद्र तट मौजूद हैं। यह अभयारण्य पक्षियों की लगभग 309 प्रजातियों (निवासी और प्रवासी पक्षी) को अनुकूल वातावरण प्रदान करता है।

यहाँ लुप्तप्राय पक्षी प्रजातियाँ, जैसे- डालमेटियन पेलिकन, एशियन ओपन बिल स्टॉर्क, ब्लैक-नेकड स्टॉर्क, डार्टर, ब्लैक-हेडेड आइबिस, यूरेशियन स्पूनबिल और इंडियन स्किमर पाई जाती हैं।

अन्य महत्त्वपूर्ण तथ्य

दो नए स्थलों के शामिल होने के पश्चात् भारत में रामसर संरक्षित आर्द्रभूमियों की कुल संख्या 49 हो गई है, जो दक्षिण एशिया में सर्वाधिक है।

विदित है कि रामसर अभिसमय को 2 फरवरी, 1971 में ईरानी शहर रामसर में अपनाया गया, जिसे 1975 में क्रियान्वित किया गया। इस संधि पर भारत ने 1982 में हस्ताक्षर किये थे।