मादक द्रव्यों के खिलाफ युद्ध

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संदर्भ:

अगले वर्ष कनाडा के ‘ब्रिटिश कोलंबिया’ प्रांत द्वारा कुछ अवैध दवाओं की छोटी मात्रा को गैर-अपराध घोषित कर दिया जाएगा, इसके बाद कनाडा ‘नशीली दवाओं के उपयोग के लिए दंड’ को हटाने की दिशा में कदम उठाने वाले देशों की बढ़ती संख्या में शामिल हो जाएगा।

हाल ही में, कनाडा ने फैसला किया है कि 31 जनवरी से ‘ब्रिटिश कोलंबिया’ में वयस्कों के लिए 2.5 ग्राम तक ओपिओइड, कोकीन, मेथामफेटामाइन और MDMA रखने की अनुमति होगी। यह इस बात का संकेत है कि कनाडा द्वारा ‘व्यसन’ (Addiction) को ‘न्यायिक मुद्दे’ के बजाय ‘मानसिक स्वास्थ्य’ के मुद्दे के रूप में माना जाएगा।

पुर्तगाली मॉडल:

इससे पहले वर्ष 2001 में, हेरोइन ओवरडोज से होने वाली मौतों के संकट का सामना करते हुए, पुर्तगाल सभी अवैध दवाओं के कब्जे और उपयोग को गैर-अपराध घोषित करने वाला दुनिया का पहला देश बन गया था।

पुर्तगाली मॉडल, नशीली दवाएं रखने पर लोगों को अदालत में भेजने के बजाय शिक्षा, उपचार और हानि में कमी करने पर केंद्रित है।

इस कदम का महत्व:

कनाडा का यह कदम ‘नीतिगत बदलावों’ की श्रृंखला में नवीनतम है। इन ‘नीतिगत बदलावों’ के तहत, वर्तमान में जारी वैश्विक ‘ड्रग्स के खिलाफ युद्ध’  (War on Drugs) में, विभिन्न देशों द्वारा अपनी प्रतिक्रियाओं को फिर से समायोजित करने के लिए विचार किया जा रहा है या उन्हें क्रियान्वित किया जा रहा है।

‘ड्रग्स के खिलाफ युद्ध’ क्या है?

1961 में, संयुक्त राष्ट्र द्वारा ‘स्वापक औषधियों’ पर एकल अभिसमय (Single Convention on Narcotic Drugs) पारित किया गया था, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से विभिन्न पदार्थों के उत्पादन और आपूर्ति को प्रतिबंधित करने की मांग की गई थी।

इस अभिसमय के द्वारा अवैध दवाओं के उपयोग और इनके उत्पादन के उन्मूलन हेतु एक वैश्विक अभियान की शुरुआत की गयी, जिसे ‘ड्रग्स के खिलाफ युद्ध’ (War on Drugs) कहा जाता है।

इस अभियान का मानना ​​था, कि नशीली दवाओं के निषेध से इनके उपभोग / खपत में कमी होगी।