मुंह के कैंसर लगाने के लिए नई तकनीक 

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पश्चिम बंगाल में गुरु नानक इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज (Guru Nanak Institute of Dental Sciences) के शोधकर्ताओं ने मुंह के कैंसर (oral cancer) का पता लगाने के लिए एक नई विधि बनाई है।

नई तकनीक 

  • यह कैंसर के चरणों और पूर्व कैंसर के चरणों में अंतर करने में सक्षम है। यह विभेदीकरण (differentiation) उच्च मानक बायोप्सी रिपोर्ट के माध्यम से किया जाता है।
  • टीम ने एक नया इमेजिंग डिवाइस बनाया है। यह उपकरण ऊतकों में रक्त प्रवाह दर को मापकर कैंसर के चरण की जांच करता है।
  • इस डिवाइस एक रक्त छिड़काव इमेजर है। यह एक आर्द्रता सेंसर, इन्फ्रारेड कैमरा और एक सॉफ्टवेयर इंजन का उपयोग करता है। सॉफ्टवेयर इंजन को इलेक्ट्रॉनिक रूप से नियंत्रित किया जाता है।

तकनीक के लाभ

मुंह के कैंसर के उन्नत चरणों का आसानी से पता लगाया जा सकता है। इस डिवाइस की कीमत 500 डॉलर है। इसे ग्रामीण क्षेत्रों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में उपलब्ध कराया जा सकता है। मुख्य रूप से तंबाकू के कारण भारत में मुंह के कैंसर की संख्या अधिक है। भारत में 80% मुंह के कैंसर का कारण तंबाकू चबाना है। पिछले दशक में, युवा वयस्कों और महिलाओं में मुंह के कैंसर की घटनाओं में वृद्धि हुई है।

इस डिवाइस में सेंसर और कंट्रोलर हैं। इन तत्वों द्वारा एकत्र किए गए जैविक डेटा को कंप्यूटर सिम्युलेटेड सॉफ्टवेयर इंजन में फीड किया जाता है। यह इंजन पूर्व कैंसर और कैंसर के मामलों को वर्गीकृत करता है।

तकनीक की जरूरत

लगभग पांचवीं महिला आबादी कैंसर से पीड़ित है। साथ ही, भारत में पुरुषों में मुंह का कैंसर सबसे आम प्रकार है। 11.28% से अधिक कैंसर मुंह के कैंसर हैं। यदि इसका पता पहले चल जाता है, तो पांच साल तक जीवित रहने की संभावना होती है। बाद के चरणों में, जीवित रहने की दर 65% तक गिर जाती है।

भारत सरकार के प्रयास

भारत में लगभग 60% मुंह के कैंसर का इलाज संभव है, बशर्ते कि उनका पहले पता चल जाए। भारत सरकार ने राष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण कार्यक्रम (National Cancer Control Programme) की स्थापना की है। इस कार्यक्रम ने क्षेत्रीय कैंसर केंद्र शुरू किए हैं। NPCDCS का अर्थ National Programme for Prevention and Control of Cancer, Diabetes, Cardiovascular disease and Stroke है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य शामिल जोखिम कारकों की जांच, निदान और पता करना है।