राष्ट्रपति शासन

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संदर्भ:

केंद्रीय गृह मंत्रालय अमित शाह ने ‘राज्य’ में राष्ट्रपति शासन की संभावना से इनकार किया है, क्योंकि भारी जनादेश वाली निर्वाचित सरकार को बर्खास्त करना अनुचित होगा।

संबंधित प्रकरण:

कानून व्यवस्था चरमराने का आरोप लगाते हुए राज्य में केंद्रीय शासन की मांग उठ रही है। कार्यकर्ताओं के अपनी मांग को जायज ठहराने के लिए राजनीतिक हत्याओं, सामूहिक बलात्कार और हिंसा के अन्य स्वरूपों रूपों का हवाला दिया जा रहा है।

भारतीय संदर्भ में राष्ट्रपति शासन:

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत, भारत के राष्ट्रपति को, यह समाधान होने पर कि, ‘राज्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है जिसमें उस राज्य का शासन संविधान के उपबंधों के अनुसार नहीं चलाया जा सकता है’, राज्य सरकार को निलंबित करने और देश के किसी भी राज्य के राष्ट्रपति शासन लगाने की शक्ति प्रदान की गयी है।

इसके लिए ‘राज्य आपातकाल’ (State Emergency) या ‘संवैधानिक आपातकाल’ (Constitutional Emergency) के रूप में भी जाना जाता है।

राष्ट्रपति शासन लागू होने पर कोई मंत्रिपरिषद नहीं होती है। इस दौरान विधान सभा या तो स्थगित या भंग हो जाती है।

राज्य की सरकार केंद्र सरकार के प्रत्यक्ष नियंत्रण में आ जाती है और राज्यपाल भारत के राष्ट्रपति का प्रतिनिधित्व करते हुए कार्यवाही जारी रखते हैं।

संसदीय अनुमोदन और अवधि:

राष्ट्रपति शासन लागू करने के लिए संसद के दोनों सदनों की मंजूरी की आवश्यकता होती है।

अनुमोदित होने के बाद किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन छह महीने की अवधि तक लागू रह सकता है।

राष्ट्रपति शासन को अधिकतम तीन साल तक के लिए लगाया जा सकता है और इसके लिए प्रति छह महीने के बाद संसद के दोनों सदनों से अनुमोदन लेना आवश्यक होता है।