रो बनाम वेड मामला

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उत्तर: यह 1973 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया गया ऐतिहासिक निर्णय है।

इस फैसले के द्वारा अमेरिका में गर्भपात को वैध बना दिया गया था।

चर्चा का कारण:

जानकारी के मुताबिक, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट अपने इस फैसले को पलटने के लिए तैयार है।

चूंकि अमेरिका में ‘गर्भपात के अधिकार’ की रक्षा करने वाला कोई संघीय कानून नहीं है, इसलिए ‘रो बनाम वेड’ मामले के फैसले को पलटने से ‘गर्भपात कानून’ पूरी तरह से राज्यों का विषय बन जाएगा।

हालंकि, इसके बाद ‘रूढ़िवादी राज्य’ (Conservative states) अपने राज्यों में, सुप्रीम कोर्ट द्वारा 1973 में ‘भ्रूण व्यवहार्यता मानक’ निर्धारित करने से पहले के गर्भपात को प्रतिबंधित करने वाले कानूनों को वापस लागू कर सकते हैं।

भारत में गर्भापात संबंधी प्रावधान:

भारत में ‘मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट’, 1971 (Medical Termination of Pregnancy Act, 1971) के अंतर्गत, गर्भावस्था के 20 सप्ताह तक गर्भपात की अनुमति प्रदान की गयी है।

2021 में एक संशोधन के माध्यम से, विशेष परिस्थितयों में गर्भवती महिलाओं- जैसे बलात्कार या अनाचार के शिकार लोगों के लिए, दो पंजीकृत डॉक्टरों की मंजूरी से गर्भपात की अनुमति के लिए निर्धारित 20 सप्ताह की ऊपरी सीमा को बढाकर 24 सप्ताह कर दिया गया था।

विकलांग भ्रूण होने के मामले में, गर्भपात के लिए कोई समय सीमा निर्धारित नहीं है, लेकिन इसके लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों द्वारा स्थापित विशेषज्ञ डॉक्टरों के एक मेडिकल बोर्ड द्वारा अनुमति लेनी आवश्यक है।