लंपी त्वचा रोग के लिए स्वदेशी टीका

89

केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री ने पशुओं को गाँठदार त्वचा रोग या ‘लंपी त्वचा रोग’ (Lumpy skin disease – LSD) से बचाने के लिए स्वदेशी वैक्सीन लम्पी- प्रो वैक-इंड (Lumpi-ProVacInd) को लांच किया है।

इस वैक्सीन को राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र, हिसार (हरियाणा) द्वारा ‘भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान’, इज्जतनगर (बरेली) के सहयोग से विकसित किया गया है।

लंपी त्वचा रोग:

गाँठदार त्वचा रोग या ‘लंपी त्वचा रोग’ (Lumpy skin disease – LSD) मवेशियों में होने वाला एक संक्रामक रोग है जो ‘पॉक्सविरिडे परिवार’ (family Poxviridae) के वायरस के कारण होता है, जिसे ‘नीथलिंग वायरस’ भी कहा जाता है।

एक वायरल बीमारी है, जिससे गोवंशीय पशु और भैंस दीर्घकालिक रुग्णता का शिकार हो जाते है।

लक्षण: यह पशुओं के पूरे शरीर में विशेष रूप से सिर, गर्दन, अंगों, थन (मादा मवेशी की स्तन ग्रंथि) और जननांगों के आसपास दो से पाँच सेंटीमीटर व्यास की गाँठ के रूप में दिखाई देता है। यह गाँठ बाद में धीरे-धीरे एक बड़े और गहरे घाव का रूप ले लेती है।

संचरण: यह बीमारी मच्छरों, मक्खियों और जूँओं के साथ-साथ पशुओं की लार तथा दूषित जल एवं भोजन के माध्यम से फैलती है।

लंपी त्वचा रोग’ ( LSD) वायरस, बिना किसी कीट वाहक की आवश्यकता के सीधे संचरण के साथ, संभवतः साँस द्वारा और निश्चित रूप से संक्रमित सामग्री, संक्रमित व्यक्तियों [मनुष्य से मनुष्य], और प्रयोगशाला से प्राप्त संक्रमण के सीधे संपर्क में आने से मनुष्यों को संक्रमित करने में सक्षम है।