लैंग्या वायरस

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लैंग्या वायरस एक जूनोटिक वायरस है जिसका मतलब है कि यह जानवरों से इंसानों में फैल सकता है।

लैंग्या जीनस हेनिपावायरस का हिस्सा है, जिसमें एक सिंगल स्ट्रैंडेड RNA जीनोम एक नकारात्मक अभिविन्यास के साथ है।

हेनिपावायरस पैरामिक्सोविरिने की अद्वितीय विशेषताएँ उनके बड़े जीनोम हैं, लंबे समय तक अपरिवर्तित क्षेत्र यह एशिया-प्रशांत क्षेत्र में ज़ूनोसिस का उभरता हुआ कारण है।

नोवल लैंग्या वायरस:

नया खोजा गया लैंग्या वायरस ‘फाइलोज़ेनेटिक रूप से अलग हेनिपावायरस’ है।

पहले खोजे गए हेनिपावायरस प्रकार के अन्य वायरस मोजियांग, घनियन, सीडर, निपाह और हेंड्रा हैं।

इनमें से निपाह और हेंड्रा को मनुष्यों में घातक बीमारियों का कारण माना जाता है।

लैंग्या का जीनोम संगठन “अन्य हेनिपावायरस के समान” है और यह “मोजियांग हेनिपावायरस” से निकटता से संबंधित है, जिसे दक्षिणी चीन में खोजा गया था।

लक्षण:

बुखार, थकान, खाँसी, जी मिचलाना, सिरदर्द, भूख न लगना आदि।

उपचार:

मनुष्यों के लिये कोई लाइसेंस प्राप्त दवाएँ या टीके नहीं हैं।

लैंग्या वायरस का प्रभाव:

गंभीर संक्रमण के मामले में लैंग्या वायरस संभावित रूप से मनुष्यों के लिये घातक हो सकता है। लैंग्या, विषाणुओं के उसी परिवार से संबंधित है जिससे घातक निपाह विषाणु संबंधित है जो आमतौर पर चमगादड़ों में पाया जाता है।