लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 33(7)

185

संदर्भ:
हाल ही में, भारत के निर्वाचन आयोग ने केंद्रीय विधि मंत्रालय से उन सीटों को सीमित करने पर विचार करने के लिए कहा, जहां से एक उम्मीदवार सिर्फ एक सीट के लिए चुनाव लड़ सकता है।


इस संबंध में शक्ति:
संविधान में संसद को संसद एवं राज्य विधानसभाओं के चुनाव से संबंधित सभी मामलों में प्रावधान करने की अनुमति दी गयी है।
इसके अनुसार, संसद द्वारा निम्नलिखित कानून बनाए गए हैं:
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 (Representation of the People Act 1950)।
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951(Representation of the People Act 1951)।
परिसीमन आयोग अधिनियम 1952 (Delimitation Commission Act of 1952)।
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 33(7):
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 33 (7) के तहत, किसी उम्मीदवार को दो निर्वाचन क्षेत्रों से कोई भी चुनाव (संसदीय, राज्य विधानसभा, द्विवार्षिक परिषद, या उप-चुनाव) लड़ने की अनुमति दी गयी है।
यह प्रावधान 1996 में लागू किया गया था, इसके पहले एक उम्मीदवार के चुनाव लड़ने वाले निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या पर कोई रोक नहीं थी।
धारा 70, उम्मीदवारों को लोकसभा/राज्य में दो निर्वाचन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने पर रोक लगाती है।
उम्मीदवारों को एक से अधिक सीटों से चुनाव लड़ने से क्यों रोका जाना चाहिए?
‘एक व्यक्ति, एक वोट, एक उम्मीदवार और एक निर्वाचन क्षेत्र’ (One person, one vote & one candidate, one constituency) लोकतंत्र की कहावत है। हालाँकि, कानून के अनुसार, जैसा कि आज है, एक व्यक्ति एक ही पद के लिए दो निर्वाचन क्षेत्रों से एक साथ चुनाव लड़ सकता है।
जब कोई उम्मीदवार दो सीटों से चुनाव लड़ता है, तो वह यदि दोनों सीटों पर जीत हासिल करता है तो उसे अनिवार्यतः दो सीटों में से एक सीट को खाली करना होगा। यह प्रावधान, उप-चुनाव कराने के लिए सरकारी खजाने, सरकारी जनशक्ति और अन्य संसाधनों पर परिणामी अपरिहार्य वित्तीय बोझ के अलावा, जिस निर्वाचन क्षेत्र से उम्मीदवार छोड़ रहा है उसके निर्वाचन क्षेत्र के मतदाताओं के साथ भी अन्याय है।