विज्ञान में महिलाएं

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संदर्भ: विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो दशकों में महिला वैज्ञानिकों की संख्या में वृद्धि हुई है।


महत्वपूर्ण बिंदु:
शोधकर्ताओं में महिलाओं की संख्या 13.9% (2015) से बढ़कर 18.7% (2018) हो गयी है।
स्नातकोत्तर स्तर तक महिलाओं की अच्छी संख्या में भागीदारी दर्ज की गयी है, और फिर पोस्ट-डॉक्टरेट स्तर पर इनकी संख्या में कमी आई है।
इंजीनियरिंग में महिलाएं (14.5%) <प्राकृतिक विज्ञान में महिलाएं (22.5%) < स्वास्थ्य में महिलाएं (24.5%)


संबंधित मुद्दे:
‘ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट’, 2018 के अनुसार, 149 देशों की सूची में भारत 108वें स्थान पर है।
उच्च शिक्षा पर 2019 का अखिल भारतीय सर्वेक्षण, आंशिक रूप से विवाह और परिवार नियोजन के दबाव के कारण, डॉक्टरेट स्तर पर महिला भागीदारी में एक महत्वपूर्ण अंतराल को दर्शाता है।
अन्य मुद्दे: पुरुष-प्रधान क्षेत्र में एक बाहरी होने का अकेलापन, पूर्वाग्रह, एक निरंतर संघर्ष, ग्लास-सीलिग इफ़ेक्ट।
महिला वैज्ञानिकों को अक्सर अपने पुरुष समकक्षों की तुलना में अकादमिक हाउसकीपिंग का अधिक बोझ उठाना पड़ता है।