विश्व यूनानी दिवस

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महान यूनानी शोधकर्त्ता हकीम अज़मल खान के जन्म दिवस को प्रत्येक वर्ष 11 फरवरी को यूनानी दिवस के रूप में मनाया जाता है। हकीम अज़मल खान एक प्रतिष्ठित भारतीय यूनानी चिकित्सक थे जो एक स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षाविद् और यूनानी चिकित्सा में वैज्ञानिक अनुसंधान के संस्थापक भी थे।

हकीम अज़मल खान ने वर्ष 1921 में कॉन्ग्रेस के अहमदाबाद अधिवेशन की अध्यक्षता भी की थी। सर्वप्रथम वर्ष 2017 में केंद्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (CRIUM), हैदराबाद में विश्व यूनानी दिवस का आयोजन किया गया था।

यूनानी चिकित्सा पद्धति का उद्भव व विकास यूनान में हुआ। भारत में यूनानी चिकित्सा पद्धति अरब के लोगों के माध्यम से पहुँची और यहाँ के प्राकृतिक वातावरण एवं अनुकूल परिस्थितियों की वजह से इस पद्धति का बहुत विकास हुआ।

भारत में यूनानी चिकित्सा पद्धति के महान चिकित्सक और समर्थक हकीम अज़मल खान (1868-1927) ने इस पद्धति के प्रचार-प्रसार में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। इस पद्धति के मूल सिद्धांतों के अनुसार, रोग शरीर की एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। शरीर में रोग उत्पन्न होने पर रोग के लक्षण शरीर की प्रतिक्रिया के परिणामस्वरूप उत्पन्न होते हैं।

क्या है यूनानी चिकित्सा पद्धति?

  • भारत में यूनानी चिकित्सा पद्धति का एक लंबा और प्रभावशाली इतिहास रहा है। यह भारत में ग्यारहवीं शताब्दी के आसपास अरबों और फारसियों द्वारा शुरू की गई थी।
  • इसमें यूनानी शिक्षा, अनुसंधान और स्वास्थ्य देखभाल संस्थानों की सबसे बड़ी संख्या है।
  • यूनानी चिकित्सा पद्धति यूनान में उत्पन्न हुई। इसकी नींव हिप्पोक्रेट्स द्वारा रखी गई थी।
  • यह प्रणाली अरबों के लिए अपने वर्तमान स्वरूप का श्रेय देती है, जिन्होंने न केवल ग्रीक साहित्य को अरबी में प्रस्तुत करके, बल्कि अपने स्वयं के योगदान के साथ अपने दिन की दवा को समृद्ध किया।