वैकल्पिक ईंधन के रूप में इथेनॉल

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संदर्भ:

  • यद्यपि देश में ऑटो-ईंधन में इथेनॉल की हिस्सेदारी बढ़ाने में लगातार प्रगति हुई है। वाहन-ईंधन में इथेनॉल की हिस्सेदारी एक साल पहले 5% थी, जोकि ‘इथेनॉल आपूर्ति वर्ष’ (Ethanol Supply Year – ESY) 2020-21 (दिसंबर-नवंबर) में बढ़कर 8.1% हो गयी है। यदि वर्ष 2025 तक 20% इथेनॉल सम्मिश्रण का लक्ष्य प्राप्त करना है, तो इसके लिए कई मुद्दों पर ध्यान की आवश्यकता होगी।

इथेनॉल सम्मिश्रण का महत्व:

  • चूंकि, पेट्रोलियम उत्पादों का अधिकांश उपयोग परिवहन क्षेत्र में किया जाता है, ऐसे में ‘20% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल’ (E20) प्रयोग किए जाने का सफल कार्यक्रम, संभावित रूप से देश के लिए प्रति वर्ष $4 बिलियन की बचत कर सकता है।
  • E20 का प्रयोग किए जाने से, मूल रूप से नियमित पेट्रोल के लिए डिज़ाइन किए गए चार पहिया वाहनों की ईंधन दक्षता में 6-7% की अनुमानित कमी होती है।

पृष्ठभूमि:

  • सरकार द्वारा इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (Ethanol Blended Petrol- EBP) कार्यक्रम के तहत ‘राष्ट्रीय जैव ईधन नीति’ -2018 (National Policy on Biofuels-2018 : NBP-2018) के अनुरूप पेट्रोल जैसे मुख्य मोटर वाहन ईंधनों के साथ इथेनॉल के मिश्रण को बढ़ावा दिया जा रहा है।
  • इस नीति में वर्ष 2030 तक पेट्रोल में 20% इथेनॉल के मिश्रण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

इथेनॉल सम्मिश्रण की सीमा को निर्धारित करने वाले कारक:

देश भर में पर्याप्त गुणवत्ता वाले फीडस्टॉक (feedstock) की कमी और इथेनॉल की यत्र-तत्र (sporadic) उपलब्धता इथेनॉल सम्मिश्रण की सीमा को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, क्योंकि वर्तमान में फीडस्टॉक की आपूर्ति, मुख्य रूप से चीनी उत्पादक राज्यों में ही केंद्रित है।

इस संबंध में सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयास:

सरकार ने गन्ना और खाद्यान्न आधारित कच्चे माल से इथेनॉल के उत्पादन की अनुमति दे दी है।

सरकार द्वारा गन्ना आधारित कच्चे माल से निर्मित इथेनॉल के लिए ‘मिल से बाहर’ की कीमत निर्धारित कर दी गयी है।

विभिन्न फीडस्टॉक से उत्पादित इथेनॉल के लिए पारिश्रमिक मूल्य तय किए गए हैं।

शीरा और अनाज आधारित नई भट्टियों / आसवनी (Distilleries) की स्थापना तथा मौजूदा भट्टियों के विस्तार के लिए ब्याज में छूट संबंधी योजनाओं को अधिसूचित किया गया है।

इथेनॉल (Ethanol)

इथेनॉल का उत्पादन स्टार्च की उच्च मात्रा वाली फसलों, जैसे कि गन्ना, मक्का, गेहूँ आदि से किया जा सकता है।

भारत में, इथेनॉल का उत्पादन मुख्यतः गन्ना के शीरे से किण्वन प्रक्रिया द्वारा किया जाता है।

इथेनॉल को विभिन्न सम्मिश्रणों को बनाने के लिए गैसोलीन के साथ मिश्रित किया जा सकता है।

चूंकि इथेनॉल के अणुओं में ऑक्सीजन पाया जाता है, जिसकी वजह से इंजन, ईंधन को पूर्णतयः दहन करने में सक्षम होता है, परिणामस्वरूप उत्सर्जन और पर्यावरण प्रदूषण कम होता है।

इथेनॉल का उत्पादन सूर्य की उर्जा प्राप्त करने वाले पादपों से किया जाता है, इसलिए इथेनॉल को नवीकरणीय ईंधन भी माना जाता है।