श्री रामानुजाचार्य

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संदर्भ:

प्रधानमंत्री नरेंद्र नोदी द्वारा 5 फरवरी को हैदराबाद में ‘समानता की मूर्ति’ / ‘स्टैच्यू ऑफ इक्वेलिटी’ (Statue of Equality) का अनावरण किया जाएगा। इसे विश्व की दूसरी सबसे बड़ी प्रतिमा बताया जा रहा है।

‘स्टैच्यू ऑफ इक्वेलिटी’, 11वीं सदी के महान समाज सुधारक और संत रामानुजाचार्य (Sri Ramanujacharya) की विराजमान अवस्था में 216 फुट ऊंची प्रतिमा है।

‘समानता की मूर्ति’ / ‘स्टैच्यू ऑफ इक्वेलिटी’ के बारे में:

विराजमान अवस्था में निर्मित तथा विश्व की दूसरी सबसे ऊंची मूर्ति ‘पंचलौह’ धातुओं – अर्थात स्वर्ण, तांबा, चांदी, पीतल और जस्ता, पांच धातुओं को मिलकर बनाई गयी है।

मंदिर के आंतरिक गर्भगृह में स्थापित श्री रामानुजाचार्य की एक अन्य प्रतिमा 120 किलो सोने से बनी है। रामानुजाचार्य स्वामी 120 वर्ष तक जीवित रहे थे, अतः इसी स्मृति में  120 किलो सोने से बनी मूर्ति की स्थापना की जा रही है।

श्री रामानुजाचार्य के बारे में:

वैष्णव संत रामानुजाचार्य का जन्म सन 1017 में, तमिलनाडु में हुआ था। वे विशिष्टाद्वैत वेदांत के प्रवर्तक थे।

रामानुजाचार्य ‘वैष्णववाद’ के दर्शन में सबसे सम्मानित आचार्य हैं।

उन्हें ‘इलया पेरुमल’ (Ilaya Perumal) के नाम से भी जाना जाता है, जिसका अर्थ है ‘दीप्तिमान’।

भक्तिवाद के उनके दार्शनिक विचारों का ‘भक्ति आंदोलन’ पर गंभीर प्रभाव पड़ा।

वे वेदांत की विशिष्‍टाद्वैत धारा के मुख्‍य प्रणेता थे।

उन्होंने ब्रह्म सूत्र और भगवद गीता पर भाष्य जैसी संस्कृत में कई महत्वपूर्ण रचनाएँ की।