सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम

121

संदर्भ:

‘केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय’ (Micro, Small and Medium Enterprises) के विकास आयुक्त कार्यालय द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार:

महाराष्ट्र में अनुसूचित जातियों के उद्यमियों के स्वामित्व वाले ‘सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों’ (MSME) की संख्या (96,805 उद्यम) देश में सबसे अधिक है।

इस सूची में, 42,997 उद्यमों के साथ तमिलनाडु और 38,517 इकाइयों के साथ राजस्थान क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर है।

इस सूची में चौथा, पांचवां और छठा स्थान क्रमशः उत्तर प्रदेश (36,913 इकाइयां), कर्नाटक (28,803 उद्यम) और पंजाब (24,503 इकाइयां) का है।

कुल: 23 जनवरी, 2022 तक, अखिल भारतीय स्तर पर अनुसूचित जाति के स्वामित्व वाले उद्यमों की संख्या 4,53,972 थी, जिनमें से सूक्ष्म उद्यमों की संख्या 4,50,835, लघु उद्यम – 3,004 और मध्यम उद्यमों की संख्या- 133 थी।

राष्ट्रीय स्तर पर: आम तौर पर, MSMEs की कुल राष्ट्रीय संख्या में अनुसूचित जाति के उद्यमियों के स्वामित्व वाले उद्यमों का अनुपात 6% है।

भारत में MSME का पंजीकरण:

उदयम पंजीकरण प्रक्रिया (Udyam system of registration) 1 जुलाई, 2020 को लागू हुई थी। किसी भी सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम’ (MSME) के लिए- चाहे वह किसी भी स्वामित्व की सामाजिक श्रेणी का हो- केंद्र और राज्य सरकारों से रियायतों या लाभों का लाभ उठाने के लिए ‘उदयम पंजीकरण प्रक्रिया’ के तहत पंजीकरण करवाना एक पूर्व-शर्त है।

इसके लिए पंजीकरण, स्व-घोषणा (self-declaration) के आधार पर ऑनलाइन दाखिल किया जा सकता है। इस प्रणाली के लागू होने के पश्चात्, प्रमाण के रूप में दस्तावेज, कागजात या प्रमाण पत्र अपलोड करना आवश्यक नहीं होगा।

संयंत्र, मशीनरी और उपकरण और कारोबार में निवेश, MSME वर्गीकरण के लिए बुनियादी मानदंड होंगे।

किसी भी उद्यम के पिछले वर्ष के आईटी रिटर्न से संबंधित निवेश की गणना करते समय तथा कारोबार की गणना करते समय, माल या सेवाओं अथवा दोनों के निर्यात को शामिल नहीं किया जाएगा।

उद्यमियों को पंजीकरण और उसके बाद की सुविधा प्रदान करने हेतु देश भर में ‘चैंपियंस कंट्रोल रूम’ को कानूनी रूप से जिम्मेदार बनाया गया है।

इन उपायों का महत्व और प्रभाव:

सरकार द्वारा शुरू किए गए ये उपाय MSMEs के काम करने के तरीके को पूरी तरह से बदल देंगे तथा इनको विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम करेंगे, और इसके परिणामस्वरूप नए उद्यमों की शुरुआत को प्रोत्साहन मिलेगा।

प्रोत्साहन दिए जाने के पश्चात, ये उद्यम महामारी को नियंत्रण में लाने के लिए तेजी से अर्थव्यवस्था की ‘वी-आकार’ की वहाली (V-shaped recovery) का नेतृत्व करने की स्थिति में होंगे।

MSMEs का महत्व:

देश के भौगोलिक विस्तार में MSMEs की लगभग 63.4 मिलियन इकाईयां कार्यरत हैं, तथा ये उद्योग देश के विनिर्माण सकल घरेलू उत्पाद (manufacturing GDP) में लगभग 6.11% और सेवा गतिविधि सकल घरेलू उत्पाद में  24.63% और साथ ही भारत के विनिर्माण उत्पादन में 33.4% का योगदान करते हैं।

MSMEs लगभग 120 मिलियन लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं और भारत से होने वाले कुल निर्यात में लगभग 45% का योगदान करते हैं।

लगभग 20% MSMEs ग्रामीण क्षेत्रों से बाहर स्थित हैं, जोकि इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण ग्रामीण कार्यबल के नियोजन को इंगित करता है।