‘स्ट्रीट स्टूडेंट’

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तेलुगू लघु फिल्म ‘स्ट्रीट स्टूडेंट’ ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की लघु फिल्म पुरस्कार प्रतियोगिता में 2 लाख रुपए का पुरस्कार जीता। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की सातवीं प्रतिष्ठित लघु फिल्म पुरस्कार प्रतियोगिता में देश के विभिन्न हिस्सों से रिकॉर्ड 190 प्रविष्टियाँ प्राप्त हुईं।

श्री रोमी मेइतेई की ‘कारफ्यू’ फिल्म को 1.5 लाख रुपए के दूसरे पुरस्कार हेतु चुना गया है। यह फिल्म मणिपुर में एक बच्चे की कहानी के माध्यम से लोगों के जीवन के अधिकार, स्वतंत्रता, गरिमा और समानता के समक्ष रूढ़िवादी भय मनोविकृति जैसी बाधाओं को दर्शाती है।

श्री नीलेश अंबेडकर की ‘मुंघ्यार’ को 1 लाख रुपए के तीसरे पुरस्कार हेतु चुना गया है। संयोग से सभी पुरस्कार विजेता फिल्मों में बच्चों ने ही महत्त्वपूर्ण मानवाधिकारों की चिंताओं को उठाने और समाज की रूढ़िवादी सोच को उजागर करने में उत्प्रेरक की भूमिका निभाई है।

NHRC लघु फिल्म पुरस्कार योजना का उद्देश्य मानव अधिकारों के प्रचार और संरक्षण की दिशा में सिनेमाई व रचनात्मक प्रयासों को प्रोत्साहित करना तथा स्वीकार करना है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग:

  • राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) 1993 में मानवाधिकार संरक्षण अध्यादेश के तहत गठित एक वैधानिक सार्वजनिक निकाय है। 
  • इसे मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 (PHRA) द्वारा वैधानिक आधार दिया गया था।
  • संरचना: एक अध्यक्ष, जो भारत का मुख्य न्यायाधीश या सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश रहा हो। एक सदस्य जो भारत के सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश है या रहा है या एक सदस्य जो उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश है या रहा है। तीन सदस्य, जिनमें से कम से कम एक महिला होगी, जिसे मानव अधिकारों से संबंधित मामलों का ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव रखने वाले व्यक्तियों में से नियुक्त किया जाएगा।