हरियाणा में चारे के परिवहन पर प्रतिबंध

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संदर्भ:

हाल ही में, हरियाणा सरकार ने गेहूं के भूसे (wheat fodder) / चारे के अंतर-जिला और अंतर-राज्यीय परिवहन पर प्रतिबंध लगा दिया है।

सरकार के इस कदम के पीछे दिए गए तर्क:

भूसे / चारे को जिले से बाहर भेजे जाने पर, संबधित जिले में पशुओं के चारे की कमी हो सकती है।

भविष्य में, बारिश कम होने पर ‘भूसे / चारे’ की स्थिति और खराब होने की संभावना है।

दक्षिणी हरियाणा में, किसानों द्वारा गेहूं के स्थान पर सरसों की फसल को अधिक महत्व दिया जा रहा है।

इस वर्ष तापमान में असाधारण वृद्धि, और समय से पहले गर्मी शुरु होने के कारण गेहूं का उत्पादन सामान्य से कम हुआ है।

रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच भू-राजनीतिक तनाव के कारण ऐसी धारणा बन रही है कि निकट भविष्य में गेहूं की कीमतें बढ़ेंगी।

ऐसे माहौल में, राज्य के अधिकारी अन्य राज्यों के लिए चारा भेजने की अनुमति देने से पहले, स्थानीय जरूरतों को पूरा करना चाहते हैं।

आलोचनाएं:

सरकार के इस फैसले की किसान संगठनों और विपक्ष द्वारा तीखी आलोचना की जा रही है।

किसान संगठनों का कहना है, कि राज्य के अधिकारी, इस साल गेहूं के कम उत्पादन की मार झेल रहे किसानों को अपने चारे को ऊंचे दामों पर बेचकर मुनाफा कमाने की इजाजत नहीं दे रहे हैं।