हाइड्रोजन के सम्मिश्रण की पहली परियोजना का आरंभ

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संदर्भ:

राष्ट्रीय हाइड्रोजन ऊर्जा मिशन (National Hydrogen Energy Mission- NHM) के अनुरूप, ‘गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड’ (GAIL) ने सिटी गैस वितरण (CGD) नेटवर्क में हाइड्रोजन सम्मिश्रण की तकनीकी-व्यावसायिक संभाव्यता स्थापित करने के लिए पायलट परियोजना के रूप में हाइड्रोजन सम्मिश्रण शुरू किया है।

यह परियोजना, मध्य प्रदेश के इंदौर में शुरू की गई है।

इंदौर में कार्यरत एचपीसीएल (HPCL) के साथ GAIL की संयुक्त उद्यम कंपनी ‘अवंतिका गैस लिमिटेड’ को हाइड्रोजन मिश्रित प्राकृतिक गैस की आपूर्ति की जाएगी।

GAIL ने ‘सिटी गेट स्टेशन’ (CGS), इंदौर में ‘भूरे हाइड्रोजन’ (grey hydrogen) को इंजेक्ट करना अर्थात भरना शुरू कर दिया है। इस भूरे हाइड्रोजन को बाद में हरित हाइड्रोजन (Green Hydrogen) से बदल दिया जाएगा।

लक्ष्य:

सरकार द्वारा घरेलू, वाणिज्यिक और औद्योगिक खपत के लिए ‘पाइप से आपूर्ति की जाने वाली प्राकृतिक गैस’ (Piped Natural Gas – PNG) के साथ 15% ग्रीन हाइड्रोजन को मिश्रित करने की योजना बनायी जा रही है।

प्राकृतिक गैस के साथ हाइड्रोजन के सम्मिश्रण का महत्व:

हाइड्रोजन की तुलना में, इस मिश्रित प्राकृतिक गैस का उपयोग करना आसान और सुरक्षित है क्योंकि इसमें हाइड्रोजन से उत्पन्न ऊर्जा की मात्रा बहुत कम (मात्रा के हिसाब से 30% तक) होती है।

हाइड्रोजन-समृद्ध संपीड़ित प्राकृतिक गैस (Hydrogen-Enriched Compressed Natural Gas – HCNG), सीएनजी (CNG) की तुलना में कार्बन मोनोऑक्साइड उत्सर्जन में 70% अधिक कमी सुनिश्चित करेगी।

HCNG का पावर आउटपुट भी CNG की तुलना में बेहतर होता है।

यह मिश्रण, मौजूदा प्राकृतिक गैस पाइपलाइनों में हाइड्रोजन की सांद्रता को एकीकृत करता है और मीथेन में पायी जाने वाली कार्बन गहनता को कम करता है।

आवश्यकता:

वर्तमान में, ज़ीरो-उत्सर्जन करने वाला हाइड्रोजन (Zero-Emission Hydrogen), पूरे विश्व में नवीनतम चर्चा का विषय बना हुआ है।

भारत ने वर्ष 2070 तक नेट-ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्धता व्यक्त की है और नवीकरणीय ऊर्जा के साथ हाइड्रोजन, इस लक्ष्य को प्राप्त करने की कुंजी के रूप में देखा जाता है।

उर्जा स्रोत परिवर्तन के लिए, ‘प्राकृतिक गैस’ एक महत्वपूर्ण ईंधन है और सरकार का उद्देश्य वर्ष 2030 तक प्रमुख ऊर्जा टोकरी में इसकी हिस्सेदारी मौजूदा 2 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करना है।