‘बिगटेक’ और ‘फिनटेक’ का विनियमन

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संदर्भ:

आरबीआई गवर्नर ने बिगटेक (Bigtech) और फिनटेक (Fintech) कंपनियों का विनियमन करने को कहा है। इसके लिए, सुरक्षित और किफायती ई-भुगतान प्रदान करने के उद्देश्य से, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा एक ‘पेमेंट्स विजन 2025’ (Payments Vision 2025) शीर्षक से एक दस्तावेज जारी किया गया है।

‘पेमेंट्स विजन 2025‘ दस्तावेज़:

आरबीआई द्वारा अपने ‘विजन 2025’ के एक भाग के रूप में निम्नलिखित उपाय लागू करने का प्रयास करेगी:

भुगतान क्षेत्र में संलग्न ‘बड़ी तकनीकी कंपनियों’ (BigTech) और ‘फिनटेक’ का विनियमन।
‘अभी खरीदें बाद में भुगतान करें’ (Buy Now Pay Later – BNPL) सेवाएं प्रदान करने वाले भुगतान पर दिशानिर्देशों का अन्वेषण करना।
केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (central bank digital currency – CBDC) की शुरुआत की दिशा में काम करना।
निरंतर संबद्ध भुगतान (continuous linked settlement – CLS) में रुपये को शामिल करने का प्रयास करना। निरंतर संबद्ध भुगतान (CLS), 18 मुद्राओं में ‘क्रॉस-करेंसी सेटलमेंट’ के लिए सुरक्षा प्रदान करता है


इस तरह के विनियमन की आवश्यकता:

प्रणालीगत चिंताओं से बचाव हेतु: ग्राहक डेटा और परिष्कृत एल्गोरिदम का उपयोग करके उधार देने की गतिविधियों में ‘बिग टेक’ की भूमिका “प्रणालीगत चिंताओं”- जैसेकि ‘अतिरिक्त फायदा उठाने’ (over-leverage) और ‘उधारकर्ताओं का अपर्याप्त गुणवत्ता मूल्यांकन’- को जन्म दे सकती है।
अन्य चिंताएं: गूगल, अमेज़न और मेटा (Meta) जैसी बड़ी फर्मों- जिन्हें ‘बिग टेक’ के रूप में संदर्भित किया जाता है- का प्रवेश, प्रतिस्पर्धा, डेटा साझाकरण, डेटा संरक्षण और जिन स्थितियों में बैंक और NBFC अपनी सेवाओं का उपयोग करते हैं, उनमे महत्वपूर्ण सेवाओं के परिचालन अनुकूलन से संबंधित चिंताओं को भी प्रस्तुत करता है।
इसके अलावा, साइबर सुरक्षा, लेनदेन क्षमता में सॉफ्टवेयर विकास सीमाएं, ग्राहक डेटा की गोपनीयता और डेटा सुरक्षा से संबंधित जोखिम भी हैं।
पिछले साल की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट में, कुछ विनियमित वित्तीय क्षेत्र की संस्थाओं के लिए जमा स्वीकार करने वाली कंपनियों के उत्पाद संबंधी कुछ व्यापक चिंताओं को उठाया गया था।
संवेदनशील उपयोगकर्ता डेटा: बिग-टेक और फिनटेक कंपनियां परिष्कृत सेवाएं प्रदान करती हैं। इन सेवाओं में बगैर किसी संपार्श्विक या क्रेडिट-हिस्ट्री सहित उपयोगकर्ताओं को ऋण जारी करने के लिए विभिन्न स्रोतों से संवेदनशील डेटा का उपयोग किया जाता है।
मोबाइल ऐप सहित डिजिटल चैनलों के माध्यम से ऋण देने के मुद्दे: अनुचित व्यवहार, डेटा गोपनीयता, दस्तावेज़ीकरण, पारदर्शिता और लाइसेंस शर्तों के उल्लंघन से संबंधित मुद्दे।
कई नियामक: फिनटेक को एक साथ काम करने के लिए कई नियामकों की आवश्यकता होती है, क्योंकि ब्लॉकचेन या ‘डी-सेंट्रलाइज्ड फाइनेंस’ (DeFi) जैसी एकल तकनीक के कई उपयोग हो सकते हैं जो अलग-अलग निगरानी के दायरे में आते हैं।
अनामिकता या गुमनामी: ‘डी-सेंट्रलाइज्ड फाइनेंस’ में ‘अनामिकता’ (Anonymity) होने की वजह से, यह नियामकों के लिए अद्वितीय चुनौतियां पेश करता है। एक ‘केंद्रीकृत शासी निकाय’ की कमी और ‘कानूनी अनिश्चितताएं’ विनियमन के पारंपरिक दृष्टिकोण को कुछ हद तक अप्रभावी बना सकती हैं।