इथेनॉल संयंत्र

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10 अगस्त, 2022 को प्रधानमंत्री हरियाणा के पानीपत में दूसरी पीढ़ी के इथेनॉल संयंत्र का वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्‍यम से लोकार्पण करेंगे। यह संयंत्र देश में जैव ईंधन के उत्‍पादन और उपयोग को बढ़ावा देने के सरकार के विभिन्न उपायों के अनुकूल है जो ऊर्जा क्षेत्र को अधिक सुलभ, सक्षम एवं कुशल बनाने के प्रयासों  के अनुरूप है।

दूसरी पीढ़ी के इस इथेनॉल संयंत्र का निर्माण भारतीय तेल निगम लिमिटेड ने 900 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से किया है। यह परियोजना ‘कचरे से कंचन’ उत्‍पादित करने के भारत के प्रयासों में एक नया अध्‍याय जोड़ेगी।

इसके तहत लगभग दो लाख टन पराली से प्रतिवर्ष तीन करोड़ लीटर इथेनॉल बनाया जा सकेगा और लगभग तीन लाख टन कार्बन डाईऑक्‍साइड के बराबर ग्रीन हाऊस गैसों का उत्‍सर्जन कम करने में भी मदद मिलेगी।

इथेनॉल  प्रमुख जैव ईंधनों में से एक है, जो प्रकृतिक रूप से खमीर अथवा एथिलीन हाइड्रेशन जैसी पेट्रोकेमिकल प्रक्रियाओं के माध्यम से शर्करा के किण्वन द्वारा उत्पन्न होता है।

इथेनॉल को गैसोलीन में मिलाकर यह कार चलाने के लिये आवश्यक पेट्रोल की मात्रा को कम कर सकता है जिससे आयातित महंँगे और प्रदूषणकारी पेट्रोलियम पर निर्भरता को कम किया जा सकता है। इथेनॉल अपेक्षाकृत निम्न प्रदूषणकारी ईंधन है जो पेट्रोल की तुलना में कम लागत पर समान दक्षता प्रदान करता है।