भारत में धन प्रेषण की स्थिति

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चर्चा में क्यों
विश्व बैंक समूह की रिपोर्ट (2021) के अनुसार, भारत को हस्तांतरित वार्षिक प्रेषण (Remittances) $87 बिलियन होने का अनुमान है, जो वैश्विक स्तर पर सर्वाधिक है।


पृष्ठभूमि
विदेश मंत्रालय के अनुसार, दुनिया भर में 13.4 मिलियन से अधिक अनिवासी भारतीयों में से लगभग 64% खाड़ी सहयोग परिषद (Gulf Corporation Council : GCC) के देशों में निवास करते हैं ।
जी.सी.सी. में सर्वाधिक अनिवासी क्रमश: संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और कुवैत में रहते हैं।
अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के अनुसार, जी.सी.सी. देशों में रहने वाले लगभग 90% भारतीय प्रवासी निम्न और अर्ध-कुशल श्रमिक हैं।
प्रवासी भारतीयों के लिये अन्य महत्वपूर्ण गंतव्य देश संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा हैं।


भारत को उच्च प्रेषण की प्राप्ति
प्रतिवर्ष भारत से लगभग 25 लाख लोग रोज़गार वीज़ा पर विश्व के विभिन्न हिस्सों में जाते हैं।
भारत के बाद सर्वाधिक वार्षिक प्रेषण प्राप्त करने वाले देशों में क्रमश: चीन ($53 बिलियन), मैक्सिको, फिलीपींस और मिस्र का स्थान है।
वर्ष 2021 में भारत को हस्तांतरित प्रेषण में विगत वर्ष की तुलना में 4.6% की वृद्धि देखी गई।
हालाँकि, विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के सकल घरेलू उत्पाद में प्रेषण का योगदान लगभग 3% ही है जो नेपाल (24.8%), पाकिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश जैसे देशों की तुलना में कम है।
वर्ष 2015 में सरकार ने भारतीय प्रवासियों की सहयता हेतु एकीकृत शिकायत निवारण पोर्टल ‘मदद’ की शुरूआत की थी।


उत्प्रवास विधेयक के प्रावधान
भारत सरकार ने वर्ष 2021 में एक नया उत्प्रवास विधेयक प्रस्तावित किया जिसका उद्देश्य उत्प्रवास प्रबंधन को एकीकृत करना और प्रवासी श्रमिकों के कल्याण को बढ़ावा देना है।
यह विधेयक 18 अधिसूचित देशों में प्रवास के लिये आवेदन करने वाले श्रमिकों की उत्प्रवास आवश्यक जाँच (Emigration Check Required : ECR) श्रेणी की प्रणाली को संशोधित करने का प्रस्ताव करता है।
ई.सी.आर. श्रेणी में मुख्य रूप से वे लोग शामिल हैं जो 10वीं कक्षा पास नहीं है और जोखिम भरे अनौपचारिक उत्प्रवास की चुनौती का सामना करते हैं।
यह विधेयक सभी श्रेणी के श्रमिकों के लिये विश्व के किसी भी देश में जाने से पहले पंजीकरण को अनिवार्य करता है, ताकि संकट की स्थिति में बेहतर समर्थन और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
इस विधेयक के तहत प्रस्तावित उत्प्रवास प्रबंधन प्राधिकरण नीतिगत मार्गदर्शन प्रदान करने वाला प्रमुख प्राधिकारी होगा।
यह विधेयक श्रमिकों के अतिरिक्त प्रतिवर्ष बाहर जाने वाले लगभग 0.5 मिलियन छात्रों को भी शामिल करता है।