दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC) में परिवर्तन

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संदर्भ: भारतीय दिवाला और शोधन अक्षमता बोर्ड (Insolvency and Bankruptcy Board of India – IBBI) ने दिवाला और दिवालियापन संहिता (Insolvency and Bankruptcy Code – IBC) में संशोधन किया है, जिसका उद्देश्य परिवर्तनों में तेजी लाना और वसूली को अधिकतम करना है।

मुख्य परिवर्तन:

यदि कोई समाधान योजना नहीं है, तो लेनदार अलग से संपत्ति बेच सकते हैं।
समाधान पेशेवरों के लिए ‘प्रदर्शन-आधारित वेतन संरचना’ निर्धारित की गयी है।
समाधान पेशेवरों की प्राथमिक भूमिका ‘कॉर्पोरेट देनदार के पुनरुद्धार’ को सुनिश्चित करना है।
दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC) के बारे में:

IBC को वर्ष 2016 में अधिनियमित किया गया था, इसका उद्देश्य विफल व्यवसायों से संबधित निपटान कार्यवाहियों में तीव्रता लाना तथा आर्थिक सुधारों को प्रोत्साहन देना था।
यह संहिता, सभी वर्गों के ऋण-दाताओं तथा ऋण-कर्ताओं के लिए इन्सॉल्वेंसी- निपटान हेतु, मौजूदा विधायी ढांचे के प्रावधानों को समेकित करके एक मंच प्रदान करती है।