‘लम्पी-प्रोवैक’ वैक्सीन

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👉कृषि और किसान कल्याण मंत्री ने 10 अगस्त, 2022 को पशुधन को त्वचा रोग से बचाने के लिये स्वदेशी वैक्सीन लम्पी-प्रोवैक का शुभारंभ किया।

👉 इस वैक्सीन को हरियाणा स्थित हिसार के राष्ट्रीय अश्‍व अनुसंधान केंद्र ने विकसित किया है।

👉इस अनुसंधान में बरेली स्थित इज्‍जतनगर के भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान ने सहयोग किया है।

👉इस अवसर पर कृषि मंत्री ने इस वैक्सीन को लम्‍पी स्किन डिजीज (LSD) के उन्मूलन हेतु मील का पत्थर बताया है। इस अनुसंधान में वैज्ञानिकों ने सभी मानकों का पालन करते हुए शत-प्रतिशत प्रभावी वैक्सीन विकसित कर ली है।

👉यह वैक्‍सीन LSD से निज़ात दिलाने में कारगर होगी। LSD मवेशियों या भैंस के पॉक्सवायरस लम्पी स्किन डिज़ीज़ वायरस (LSDV) के संक्रमण के कारण होता है। 

👉खाद्य और कृषि संगठन (FAO) के अनुसार, LSD की मृत्यु दर 10% से कम है। इस बीमारी को पहली बार वर्ष 1929 में ज़ाम्बिया में एक महामारी के रूप में देखा गया था। प्रारंभ में यह ज़हर या कीड़े के काटने का अतिसंवेदनशील परिणाम माना जाता था।

👉LSD मुख्य रूप से मच्छरों और मक्खियों के काटने, कीड़ों (वैक्टर) के काटने से जानवरों में फैलता है। संक्रमण के लक्षणों में मुख्य रूप से बुखार, आंँखों और नाक से तरल पदार्थ का निकलना, मुंँह से लार का टपकना शरीर पर छाले आ जाना शामिल है।

👉इस रोग से पीड़ित पशु चारा खाना बंद कर देता है क्योंकि चारा खाने या जुगाली करने के दौरान उसे समस्या होती है, परिणामस्वरूप दुग्ध-उत्पादन में भी कमी आती है।