मुकुल रोहतगी : भारत के अगले महान्यायवादी “अटॉर्नी जनरल”

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वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी भारत के अगले महान्यायवादी (अटॉर्नी जनरल) होंगे। वर्तमान अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल का कार्यकाल 30 सितंबर को समाप्त हो रहा है। मुकुल रोहतगी का अटॉर्नी जनरल के रूप में यह दूसरा कार्यकाल होगा। इससे पहले भी वह साल 2014 से 2017 तक तीन वर्ष के लिए देश के अटॉर्नी जनरल रह चुके हैं।


महान्यायवादी के संबंध में संविधान क्या कहता है?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 76 में भारत के महान्यायवादी के पद का प्रावधान किया गया है। यह देश का सर्वोच्च विधि अधिकारी होता है यानी कानून अधिकारी होता है। यह केंद्रीय कार्यपालिका का एक अंग होता है। साधारण भाषा में कहें तो यह अदालत में भारत सरकार का केस लड़ने का काम करता है।


इसकी पात्रता क्या होती है और नियुक्ति कैसे की जाती है?
अटॉर्नी जनरल को नियुक्त करने का काम मंत्रिपरिषद की सलाह पर राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है।


महान्यायवादी के तौर पर नियुक्त होने के लिए व्यक्ति को कुछ योग्यता रखनी होती है जैसे कि वो सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनने के योग्य हो, यानी वह भारत का नागरिक हो; उसे हाईकोर्ट के जज के रूप में काम करने का पाँच सालों का अनुभव हो या किसी हाईकोर्ट में वकालत का 10 सालों का अनुभव हो या फिर राष्ट्रपति के विचार में वो क़ानूनी मामलों का जानकार हो।


यह अपने पद पर कब तक बने रह सकते हैं?
संविधान द्वारा अटॉर्नी जनरल का ऐसा कोई कार्यकाल नहीं तय किया गया है। यह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत यानी जब तक राष्ट्रपति चाहेगा तब तक महान्यायवादी अपने पद पर बना रहेगा। महान्यायवादी को हटाने की ना ही कोई प्रक्रिया संविधान में बताई गई है और ना ही कोई इसका आधार बताया गया है।