राजनीतिक दलों को नकद चंदे पर रोक लगाने का प्रस्ताव

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संदर्भ:

चुनाव आयोग ने चुनावी चंदे के रूप में दिए जाने वाले काले धन पर रोक लगाने के लिए गुमनाम राजनीतिक चंदे को 20,000 रुपये से घटाकर 2,000 रुपये करने, और नकद दान को 20% या अधिकतम 20 करोड़ रुपये तक सीमित करने का प्रस्ताव दिया है।

उद्देश्य:

पारदर्शिता: राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे में सुधार और पारदर्शिता।
समान अवसर: चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवारों द्वारा किया गया व्यय।
रिपोर्ट: ₹2,000 से ऊपर प्राप्त सभी अनुदानों की जानकारी दी जाएगी, जिससे फंडिंग में पारदर्शिता बढ़ेगी।
अन्य सिफारिशें:

डिजिटल लेनदेन: चुनाव आयोग ने एक इकाई/व्यक्ति को ₹2,000 से अधिक के सभी खर्चों के लिए ‘डिजिटल लेनदेन’ (Digital transactions) या ‘खाता प्राप्तकर्ता चेक हस्तांतरण’ को अनिवार्य बनाने की मांग की है।
चुनाव संचालन नियम, 1961 के नियम 89 में संशोधन: एक उम्मीदवार को चुनाव से संबंधित प्राप्ति और भुगतान के लिए एक अलग खाता रखना होगा और चुनाव खर्च के खाते के रूप में इसे पारदर्शी रूप से अधिकारियों को बताना होगा।
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम और विदेशी अंशदान विनियमन (संशोधन) अधिनियम (FCRA), 2010: चुनाव आयोग ने इन कानूनों के तहत पार्टियों के फंड में कोई विदेशी चंदा न आए, यह सुनिश्चित करने के लिए “चुनावी सुधार” की मांग